





Price: ₹600.00 - ₹268.00
(as of Jun 05, 2026 12:34:17 UTC – Details)
छत्रपति शिवाजी महाराज अप्रतिम थे। उनका पराक्रम, कूटनीति, दूरदृष्टि, साहस व प्रजा के प्रति स्नेहभाव अद्वितीय है। सैन्य-प्रबंधन, रक्षा-नीति, अर्थशास्त्र, विदेश-नीति, वित्त, प्रबंधन— सभी क्षेत्रों में उनकी अपूर्व दूरदृष्टि थी, जिस कारण वे अपने समकालीन शासकों से सदैव आगे रहे। राष्ट्रप्रेम से अनुप्राणित उनका जीवन सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है और अनुकरणीय भी।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘हिंदवी स्वराज’ की अवधारणा दी; अपनी अतुलनीय निर्णय-क्षमता और सूझबूझ व अविजित पराक्रम के बल पर मुगल आक्रांताओं के घमंड को चूर-चूर कर दिया; अपनी लोकोपयोगी नीतियों से जनकल्याण किया। शिवाजी महाराज की तुलना सिकंदर, सीजर, हन्नीबल, आटीला आदि शासकों से की जाती है। यह पुस्तक उस अपराजेय योद्धा, कुशल संगठक, नीति-निर्धारक व योजनाकार की गौरवगाथा है, जो उनके गुणों को ग्राह्य करने के लिए प्रेरित करेगी।.
From the Publisher
Shivaji Maharaj the Greatest by Hemantraje Gaikwad

यह पुस्तक उस अपराजेय योद्धा; कुशल संगठक; नीति-निर्धारक व योजनाकार की गौरवगाथा है; जो उनके गुणों को ग्राह्य करने के लिए प्रेरित करेगी।
छत्रपति शिवाजी महाराज अप्रतिम थे। उनका पराक्रम; कूटनीति; दूरदृष्टि; साहस व प्रजा के प्रति स्नेहभाव अद्वितीय है। सैन्य-प्रबंधन; रक्षा-नीति; अर्थशास्त्र; विदेश-नीति; वित्त; प्रबंधन— सभी क्षेत्रों में उनकी अपूर्व दूरदृष्टि थी; जिस कारण वे अपने समकालीन शासकों से सदैव आगे रहे। राष्ट्रप्रेम से अनुप्राणित उनका जीवन सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है और अनुकरणीय भी।छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘हिंदवी स्वराज’ की अवधारणा दी; अपनी अतुलनीय निर्णय-क्षमता और सूझबूझ व अविजित पराक्रम के बल पर मुगल आक्रांताओं के घमंड को चूर-चूर कर दिया; अपनी लोकोपयोगी नीतियों से जनकल्याण किया।शिवाजी महाराज की तुलना सिकंदर; सीजर; हन्नीबल; आटीला आदि शासकों से की जाती है।यह पुस्तक उस अपराजेय योद्धा; कुशल संगठक; नीति-निर्धारक व योजनाकार की गौरवगाथा है; जो उनके गुणों को ग्राह्य करने के लिए प्रेरित करेगी।
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Chhatrapati Shivaji : Vidhata Hindvi Swarajya ka by Shrinivas Kutumbale
छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन अलौकिक है। उसमें अदम्य साहस और नेतृत्व के विरले गुण अभिव्यक्त होते हैं। वर्तमान समय में यह महान् व्यक्तित्व और भी सामयिक हो चला है। शिवाजी के स्वराज्य की संकल्पना के मूल तत्त्व यदि आज लागू किए जाएँ तो भारत निस्संदेह विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच सकता है।

Shivaji Ke Management Sootra by Pradeep Thakur
आज के प्रतिस्पर्धी युग में सफल व्यक्ति कहलाने के लिए यदि कोई उद्योगपति नहीं बन सकता; तो उसे या तो नेतृत्वकर्ता बनना पडे़गा या फिर प्रशासक या प्रबंधक। ऐसे में यदि भारत को अपनी पूरी संभावनाओं के साथ इस विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा में सफल होना है; तो उसे अपने भावी नेतृत्वकर्ताओं अर्थात् युवाओं के समक्ष स्वदेशी प्रेरणा-पुरुष को ही सामने रखना पडे़गा। इस दृष्टि से राष्ट्र-निर्माण के लिए भारतीय इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा सफल व आदर्श प्रेरणा-पुरुष के अतिरिक्त और कौन हो सकता है? साधन को संसाधन (रिसोर्स) बनाने की योजना बनाने व उसे ठीक प्रकार से लागू करने की प्रक्रिया को ही प्रबंधन (मैनेजमेंट) या प्रबंधन कला या प्रबंधन कौशल कहा जाता है।

SHIVAJI KE SECRETS by Pradeep Thakur
छत्रपति शिवाजी महाराज आधुनिक प्रबंधन के महागुरु, महासाधक व संस्थापक थे तो उनके प्रबंधन-सूत्रों को हमेशा याद रखने व उन्हें अपने संगठन में लागू करने की आवश्यकता है। आज के अस्थिर व अनिश्चित विश्व में हर प्रकार के संगठन के लिए कुशल प्रबंधकों व नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है, इस 21वीं शताब्दी में किसी भी संगठन को उसमें काम करनेवाले लोग ही विश्वस्तरीय संगठन बना सकते हैं। लेकिन विशेष रूप से व्यावसायिक संगठनों के ढुलमुल व्यापार-व्यवहारों को देखते हुए ऐसा लगता है कि उनमें प्रबंधन के आधारभूत सिद्धांतों को ठीक प्रकार से समझा व लागू नहीं किया जा रहा है।

SHIVAJI Va MARATHA SAMARAJYA by PRADEEP THAKUR
शिवाजी भारत के महान् योद्धा एवं रणनीतिकार थे, जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुग़ल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वे छत्रपति बने। शिवाजी ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध की नयी शैली (शिवसूत्र) को विकसित किया। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनैतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फ़ारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया।
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Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Publication date : 1 January 2019
Edition : First Edition
Language : Hindi
Print length : 290 pages
ISBN-10 : 935322263X
ISBN-13 : 978-9353222635
Item Weight : 190 g
Dimensions : 20.32 x 12.7 x 1.27 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 1 Count
Importer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd., 4/19, Asaf Ali Raod, New Delhi-110002 (PH: 7827007777) Email: prabhatbooks@gmail.com
Packer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Generic Name : Book
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